Sunday, August 5, 2018

द फ़्रेंडशिप टेस्ट (पहली कड़ी)

बहुत समय बाद की बात है। तब इस कहानी को पढ़ने वाले सभी लोग मर चुके थे। उस काल में इंसानियत की रक्षा की ज़िम्मेदारी भी बाकी चीज़ों की तरह स्मार्ट और ऑटोमेटेड मशीनों को सौंप दी गई थी। रिश्तों की उम्र मापने वाले सॉफ़्टवेयर आ चुके थे और लोगों ने अपनी सहज बुद्धि (instinct) पर यकीन करना छोड़ दिया था। समाज ने रिलेशनशिप में नए-नए रिस्क लेने वालों और कॉम्प्रमाइज़ करने वालों को मनोरोगी मान कर इलाज के लिए 'रिहैब होम' भेज दिया था। बच्चों को दोस्ती करने की मनाही थी, केवल 18 साल से अधिक की उम्र के लोगों को ही फ्रेंड बनाने का हक दिया गया था।
 देश के बाकी नौजवानों की तरह ही जब उन दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई, तो उन्हें अपने रिश्ते की मंज़ूरी के लिए आवेदन देना पड़ा। इसके बाद सॉफ़्टवेयर टेस्ट की तारीख मुकर्रर हुई और दोनों बेसब्री से उस दिन का इंतज़ार करने लगे। घरवालों की शुभकामनाएं लेकर वो दोनों टेस्ट के लिए पहुंचे।
टेस्ट की प्रक्रिया बहुत लंबी थी। सबसे पहले एक लंबा-चौड़ा ऑनलाइन फ़ॉर्म भरना था। उम्र, लिंग, राष्ट्रीयता, रंग, जाति, धर्म, भाषा, प्रदेश आदि जैसे कई अनिवार्य कॉलम थे। अपनी राजनीतिक विचारधारा और पसंदीदा राजनेता के साथ-साथ उन मसलों के बारे में विस्तार से बताना ज़रूरी था, जिनसे आवेदक प्रभावित रहा है। इसके अलावा पसंदीदा रंग, भोजन, तीर्थस्थान, धार्मिक पुस्तक, लेखक, कवि, अभिनेता से लेकर देवी-देवताओं के बारे में बताना भी ज़रूरी था। अगर आवेदक की पसंद में बदलाव हुआ है, तो उसके संबंध में जानकारी देने के लिए भी अलग से एक कॉलम था।
दोनों को 'फ़्रेंडशिप अप्रूवल फ़ॉर्म' के इस अजीबोगरीब फ़ॉर्मेट को लेकर थोड़ा ताज्जुब तो हुआ, पर जैसे-तैसे फ़ॉर्म भरकर वो दूसरे चरण तक पहुंचे। इस चरण में दोनों के अलग-अलग कंप्यूटराइज़्ड इंटरव्यू हुए। उनसे सामान्य से लेकर निहायत ही अटपटे सवाल पूछे गए। जैसे उनसे पूछा गया कि अगर उनकी दोस्ती टूटती है, तो वे क्या करेंगे? एक सवाल ये भी था कि अगर दोस्ती टूटने के कई साल बाद दोनों का आमना-सामना होता है, तो फिर एक-दूसरे के प्रति उनका व्यवहार कैसा होगा?
तीसरे और आखिरी चरण में उनकी शारीरिक खूबियों और खामियों का मिलान किया गया। दोनों की चुस्ती-फ़ुर्ती, ताकत, वजन, लंबाई, शारीरिक बनावट से लेकर जेनेटिक जानकारियों का विश्लेषण किया गया।
अंत में उनके सोशल प्रोफ़ाइल की क्लाउड मेमोरी में टेस्ट की रिपोर्ट की कॉपी सेव कर दी गई। दोनों जल्द से जल्द टेस्ट का रिजल्ट जानना चाहते थे। आशंका और उम्मीद की मिली-जुली भावना के साथ उन्होंने एक बड़े से मॉनिटर पर एक साथ टेस्ट रिजल्ट देखना शुरू किया।
टेस्ट का रिजल्ट पॉज़िटिव था। उनके दरम्यान पनप रहे रिश्ते को कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर ने 95% कॉम्पैटिबल माना था। दोनों ने खुशी से उछल कर हाई-फ़ाइव के अंदाज़ में हाथ मिलाया। तभी कंप्यूटर से जुड़े आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस हार्डवेयर से एक मशीनी आवाज़ निकली- 'आप दोनों को अब एक-दूसरे को गले लगाने का अधिकार मिल चुका है।' इतना सुनते ही दोनों ने एक-दूसरे को अपनी बाहों में भरकर भींच लिया। दोनों कई मिनटों तक यूं ही एक-दूसरे से लिपटे रहे। तभी 'पिंग' की एक आवाज़ हुई और दोनों वर्तमान में लौट आए। कंप्यूटर की स्क्रीन पर एक बटन ब्लिंक कर रहा था, जिस पर लिखा था- "अधिक जानें"
एक बार फिर दोनों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठे थे। पल भर के लिए दोनों की नज़रें मिलीं, उनकी पुतलियों पर इत्मिनान और उत्सुकता की दो मोमबत्तियां मिलकर हज़ार वॉट के बल्ब जितनी रोशनी पैदा कर रही थीं। इसके बाद उनमें से एक ने 'अधिक जानें' का बटन दबा दिया।

क्रमश:
  

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