Thursday, August 2, 2018

ब्लैक होल का संकुचित द्रव्यमान हैं इमरान!

'ब्लैक होल' अंतरिक्ष में वो जगह होती है, जहां भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता। ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता। यहां तक कि प्रकाश भी इस काले धब्बे में प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है। 

तो इस लिहाज़ से आप पाकिस्तान को दुनिया का जीता-जागता 'ब्लैक होल' मान सकते हैं। यहां धर्मान्धता अपने चरम पर है और उसके खिंचाव से अफ़गानिस्तान और भारत जैसे पड़ोसी मुल्क भी अछूते नहीं हैं। बताने की ज़रूरत नहीं कि अमेरिका और चीन जैसे महत्वाकांक्षी देश इस 'ब्लैक होल' को हथियार बना कर अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चाहते हैं। पाकिस्तानी सेना वह औजार है, जिसकी सहायता से ये विश्व शक्तियां अलग-अलग तरह के विध्वंसकारी प्रयोग करने के लिए पाकिस्तानी अस्मिता की चीर-फाड़ करती रहती हैं।

तो क्या 'इमरान खान' भी ऐसे ही किसी प्रयोग के नए रासायनिक तत्व भर हैं? पाकिस्तान में हुए आम चुनावों के नतीजे स्पष्ट होने के बाद से भारतीय मीडिया में इस सवाल के कई तरह से जवाब दिए जा रहे हैं। लेकिन हर जवाब में नकारात्मकता ही ज़्यादा है। कोई भी पाकिस्तान के संबंध में नई उम्मीद जगाने वाली बात करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहता है।

खैर, जैसे 'ब्लैक होल' रहस्यमय होते हैं, वैसे ही पाकिस्तान एक रहस्यमय देश है। मुम्बई अटैक के मास्टरमाइंड 'हाफ़िज़ सईद' की पार्टी को चुनाव में एक भी सीट न मिलना एक ऐसा ही रहस्य है। क्या इसे पाकिस्तान में हो रहे ज़मीनी बदलावों का संकेत माना जाए? इस सवाल का जवाब भविष्य के गर्भ में है।

लेकिन क्या पाकिस्तान की दागदार राजनीतिक विरासत, वहां की सरकारों में सेना का दखल, विदेशी ताक़तों की कठपुतली बने राजनेता, देशव्यापी धर्मान्धता और कट्टरता जैसी तमाम बुराईयों के आधार पर ही इमरान सरकार के भविष्य का आंकलन करना ठीक रहेगा?

इमरान खान शायद पाकिस्तान के पहले ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जिन्होंने काफ़ी लंबा वक्त हिंदुस्तान में गुज़ारा है। एक क्रिकेटर और फिर एक कमेंटेटर की हैसियत से वह लगातार भारत का दौरा करते रहे हैं। ज़ाहिर है वे अपने पूर्ववर्ती वज़ीर-ए-आज़मों की तुलना में भारत की ज़्यादा बेहतर समझ भी रखते होंगे। उन्होंने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की इच्छा जताई है। साथ ही इमरान चाहते हैं कि उनको मिलने वाले प्राधनमंत्री आवास का इस्तेमाल जनसरोकार के कार्यों के लिए किया जाए।

कइयों को इमरान की घोषणाएं वास्तविक कम लोकलुभावन ज़्यादा लगी हैं। बेशक इसकी कई वाजिब वजहें भी हैं। पर याद रखिए, वैज्ञानिक 'ब्लैक होल' को ही नए सृजन का शुरुआती बिंदु भी मानते हैं। क्या पता इमरान वही 'संकुचित द्रव्यमान' हों, जहां से बिल्कुल नया पाकिस्तान बनना शुरू होने वाला हो।

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