Sunday, June 19, 2011

बाप तो बाप होता है...


फोर वन फोर वन को हिंदी में क्या कहते हैं...बचपन में हम दोस्त, अपनी जमात में शामिल होने वाले किसी भी नए बंदे से ये सवाल पूछा करते थे. हमें अक्सर पता होता था कि अगला बंदा जवाब नहीं बता पाएगा...सो जवाब बताने से पहले उसे हिंट दे- देकर और परेशान करते थे. अबे वहीं जिससे तू डरता है. जो घर में हमेशा तेरे पास होता है....पर जबाव किसी को आता हो, तब तो आए. आखिर में हम बंदे को बताते कि हम तेरे पापा की बात कर रहे थे. फोर वन फोर वन, हुए न पापा...आगे चलकर ये हम भाईयों के बीच कोडवर्ड बन गया. कोई शरारत चल रही हो और पापा की साइकिल की आवाज़ या घंटी सुनाई पड़ी नहीं कि सब चौकना...सूचना तुरंत युद्धस्तर पर प्रसारित कर दी जाती कि फोर वन फोर वन इज़ कमिंग. पर बाप से जीत पाना सचमुच मुश्किल होता है. पापा को हमारी शैतानी को भांपने में ज्यादा समय नहीं लगता था. कोई न कोई क्लू वो खोज ही लेते और फिर शैतानी का सारा रहस्य सामने आ जाता और डांट पड़नी शुरू होती. मैं मन ही मन सोचता कि व्योमकेश बक्शी का सीरियल तो ये देखते नहीं...और न ही हमें देखने देते हैं, िफर ये हमारी बदमाशियों के सुबूत-सुराग खोज कैसे लेते हैं. मेरे पापा एयरफोर्स में थे, अभी रेलवे में हैं...सो मन ही मन मेरा बालसुलभ मान बैठा था कि ये एयरफोर्स का ही असर होगा. जरूर वो ऐसी कोई खुिफया ट्रेनिंग देते होंगे ताकि दुश्मन देश की हर चाल-चालाकी हमारी फोर्स को समझ में आ जाए. इसी सोच ने मुझे सतर्क और सीधा दोनों कर दिया. बहुत बाद में सास भी कभी बहु थी सिरीयल के टाइटल को समझने के बाद समझ में आया कि बाप भी कभी बेटा था. वैसे अब नए ज़माने के बच्चों की शैतानियों का स्तर और तरीका दोनों बदल गया है. आम-अमरूद चुराने का ज़माना गया. अब तो शैतानियां भी हाईटेक हो गई हैं. आपने टीवी के किसी चैनल को चाइल्ड लॉक किया तो घर का राजकुमार लॉक तोड़ने का नुस्खा खोज लाएगा. ऐसे में कई बार संदेह होने लगता है कि क्या आगे आने वाली पीढ़ी की शैतानियों को भावी बाप समझ पाएंगे. शायद नहीं...संस्कार और संस्कृति का अभाव नई पीढ़ी में दिखाई देने लगा है...उससे तो यही साबित होता है. िफलहाल हमारे बाप तो हर मामले में हमारे बाप रहेंगे, लेकिन आगे का भगवान जाने...