Monday, February 22, 2010

माई नेम इज़ ममता, एंड आई एम अड़ियल


ममता दीदी के लिए इस बार रेल बजट पेश करते हुए बिहार को बिल्कुल से नज़रअंदाज़ करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी होगा. बिहार में चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है, ऐसे में जाहिर तौर पर कांग#ेस आलाकमान ने ममता पर बिहार पर मेहरबान होने का दबाव बनाया होगा. वैसे बंगाल में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए रेल बजट में बिहार औौर बंगाल पर होने वाली मेहरबानियों का राजनीतिक चश्मों से विशलेषण किया जाना तय है. इधर लालू अपना आजीवन रेल पास छिन जाने और जांच के चक#व्यूह में फंसाए जाने की वजह से ममता दीदी से पहले ही खार खाए बैठे हैं. इस बार भी अगर रेल बजट पेश करते हुए ममता और लालू के बीच की तीखी नोंक-झोंक देखने को मिल जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. बिहार के मुख्यमंत#ी नीतीश कुमार पहले ही दीदी को अपनी नई रेलों की डिमांड लिस्ट सौंप चुके हैं. और इस लिस्ट की ज़रा सी भी उपेक्षा नीतीश बर्दाश्त करेंगे, ऐसा लगता नहीं. बजट में अगर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की दिशा में कोई ठोस संकेत नहीं दिखाई दिया तो नीतीश इन दोनों मुद्दों को जाहिर तौर पर चुनावी मंचों पर भंजाने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. आम बिहारियों की बात करें, तो कोहरे के मौसम में रेलवे में मचने वाला कोहराम और जन आंदोलनों के नाम पर रेल पर पड़ने वाले पत्थरों और आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए दीदी क्या कदम उठाती हैं, इसपर सबकी निगाहें रहेंगी. इसके अलावा नक्सली इलाकों में आए दिन निशाना बनने वाली रेल और रेल पटरियों की सुरक्षा के लिए दीदी कुछ कर रही हैं या नहीं, ये जानने में भी हर किसी की दिलचस्पी होगी. लेकिन दिक्कत ये है कि ममता दबाव बनाने के लिए जानी जाती हैं, ना कि दबाव बर्दाश्त करने के लिए. इसलिए रेल बजट देखने-सुनने के बाद अगर वो माई नेम इज़ ममता, एंड आई एम अड़ियल टाइप का डायलॉग बोलती नज़र आएं, तो ताज्जुब नहीं होगा.

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