Tuesday, September 1, 2009

बड़ी मछली और छोटी मछली


बड़ी मछली और छोटी मछली
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बंसी कांटे से मछली पकड़ने के शॉर्ट एक्सपीरियंस के बेस पर इतना तो जानता ही हूं कि बड़ी मछली आसानी से पकड़ में नहीं आती ह. बड़ी मछली को जीवन का तजुर्बा ज्यादा होता है...वो जानती है कि कहां जाल बिछा है और उससे कैसे बचना है. फिर बड़ी मछली को एकाध इंच का केंचुआ या कंचे के साइज़ वाली आटे के गोली उतनी अट्रैक्टिव भी नहीं लगती होगी. सोचती होगी कि इससे मेरा क्या होगा !
पर अगर अपने शिकार सेक्टर में मंदी की वजह से छोटा हाथ मारने के चक्कर में बड़ी मछली पकड़ में आ भी जाए तो उसके लास्ट मोमेंट तक हाथ से फिसल जाने के चांसेज़ ज्यादा होते हैं। बड़ी मछली का वेट आपका कांटा तोड़ सकता है...फिर बड़ी मछली के पास इतनी ताक़त तो होती ही है कि वो थोड़ा-बहुत हाथ-पैर मारकर आपके कांटे से आज़ाद हो सके। इसलिए बड़ी मछली को पकड़ने के लिए आपका लक्की होना एकमात्र इशेंशियल क्वालिफिकेशन है. हां, अगर आप इन बॉक्स देखकर एसएमएस भांप लेने वाले और मरीज़ की नब्ज टटोले बगैर स्वाइन फ्लू का वायरस पहचान सकने वाली क़ाबिलियत रखते हैं...तो बात अलग है. तो आप एक्सेप्शनल केस हैं. वन इन मिलियन टाइप के. एक और कैटेगरी का ज़िक्र करना यहां बेहद ज़रूरी है. ये नॉट एप्लिकेबल वाली कैटेगरी है. अगर आप पुलिस सेवा, सीबीआई या फिर क्राइम कंट्रोल से संबंध रखने वाले ऐसे ही किसी संस्थान से जुड़े हैं, तो आप अपने जीवन में कभी भी बड़ी मछली नहीं पकड़ सकते हैं. हां, छोटी मछलियों से आपकी झोली हमेशा लबालब भरी रहेगी. आपने अगर लक्कीली बड़ी मछली पकड़ भी ली, तो वो नैनो सेकेंड के लिए आपके पास रहेगी. दरअसल, आपके योग में बड़ी मछली को पकड़ना लिखा ही नहीं है. ये बात अलग है कि आप ताउम्र इसी फ़िराक में होंगे कि कब बड़ी मछली पकड़ में आए. पर बावजूद इसके आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. आप चाहें तो छोटी मछली को बड़ा बनाकर प्रोजेक्ट कर सकते हैं. या फिर किसी छोटी मछली को अपने कंट्रोल में रखकर उसे बड़ा कर सकते हैं...और बाद में उसके बड़ी मछली बन जाने पर उसे ही पकड़ कर क्रेडिट ले सकते हैं. ये फ़ियर फ़ैक्टर भी अपने दिल से निकाल दीजिए कि ऐसा करने से आपकी क्रेडिब्लिटी घट जाएगी. सरकार मत्स्य पालकों को हमेशा सपोर्ट करती है. आप सोच रहे होंगे कि अगर ऐसा है तो फिर आपको प्रधानमंत्री ने बड़ी मछली पकड़ने के लिए क्यों कहा है. बड़ी सिम्पल सी बात है. कुछ बड़ी मछलियां अपनी साइज़ की औक़ात से ज़्यादा गंध फैलाने लगती हैं. जिन छोटी मछलियों के अंदर बड़ा होने का पोटेंशियल होता है, उन्हें ही निगलने की धमकी देने लगती हैं. तब मजबूरी में सरकार को इन मछलियों को पकड़ने और काबू में लाने की जुगत भिड़ानी पड़ती है. इसलिए आपको टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है. आपको तो केवल क्रेडिट लेना है. बाकि का काम सरकार खुद कर लेगी. सरकार के पास अभेद जालों की कोई कमी नहीं है. दरअसल, भूल से मैंनै आपको एक टॉप सीक्रेट अब तक नहीं बताया है. वो जो मैंने पहले वन इन मिलियन वाली कैटेगरी का ज़िक्र किया था ना...दरअसल उसी category वाले लोगों के संगठन को सरकार कहा जाता है। ये पब्लिक साइंस की परिभाषा है , याद रखियेगा .

1 comment:

  1. isse abhi tak nahin nikli bebaak akhbaar ka achha editorial kaha ja sakta hai...

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